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Azaad Kalamसवाल • विचार • संवाद
राजनीति एवं लोकतंत्र

उधार की साँसें: खोखला राष्ट्रवाद

Udhar Ki Sansein: Khokhla Rashtravad

नारेबाज़ी और दिखावटी राष्ट्रवाद की आड़ में दबते जन-सरोकार, पर्यावरणीय संकट और आर्थिक चुनौतियों पर बेबाक कलम।

पुस्तक विवरण
आवरण पर लेखकएन. सिंह (N. Singh)
श्रेणीराष्ट्रवाद एवं समकालीन राजनीति
प्रारूपपेपरबैक

पुस्तक के बारे में

नारेबाज़ी और दिखावटी राष्ट्रवाद की आड़ में कौन-से जन-सरोकार दब जाते हैं? यह पुस्तक पर्यावरणीय संकट और आर्थिक चुनौतियों पर बेबाकी से लिखती है।

प्रमुख विषय

  • राष्ट्रवाद: प्रतीक बनाम सरोकार
  • पर्यावरणीय संकट और ‘उधार की साँसें’
  • आर्थिक चुनौतियाँ और जन-जीवन