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Azaad Kalamसवाल • विचार • संवाद

वीडियो संवाद

चिंतनशील आवाज़

आज़ाद कलम का वीडियो विस्तार—ज़मीनी सवालों पर सीधा, तथ्य-आधारित संवाद। हर वीडियो के साथ उसका लिखित सारांश और उससे जुड़ी पुस्तक।

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किसान और गाँव

किसान न्याय मांग रहा है! आख़िर कब मिलेगी इंसाफ़ की आवाज़?

ज़मीन के काग़ज़ और अदालत के नोटिस हाथ में लिए किसान आख़िर किस दरवाज़े पर न्याय माँगे? खेती के संकट, क़र्ज़ और क़ानूनी उलझनों के बीच फँसे अन्नदाता की आवाज़।

मुख्य बिंदु

  • खेती घाटे का सौदा क्यों बनती जा रही है
  • ज़मीन और क़र्ज़ से जुड़े विवादों में किसान की बेबसी
  • नीतियों और ज़मीनी हकीकत के बीच की दूरी

संबंधित पुस्तक: ‘उजड़ती खेती, उजड़ते गाँव’

लोकतंत्र और सत्ता

क्या है जातीय जनगणना का सच?

जातीय जनगणना सामाजिक न्याय की कुंजी है या राजनीति का नया हथियार? केवल जातियों की गिनती से आगे बढ़कर आय, संपत्ति, शिक्षा और भागीदारी के आँकड़े क्यों ज़रूरी हैं—इस पर एन. सिंह का विश्लेषण।

मुख्य बिंदु

  • अधूरी जातिगत जनगणना आँकड़ा नहीं, भ्रम है
  • सामाजिक न्याय के लिए आय और संपत्ति के आँकड़े भी ज़रूरी
  • जनगणना और चुनावी गणित का संबंध

संबंधित पुस्तक: ‘गिनती से सत्ता तक’