किसान न्याय मांग रहा है! आख़िर कब मिलेगी इंसाफ़ की आवाज़?
ज़मीन के काग़ज़ और अदालत के नोटिस हाथ में लिए किसान आख़िर किस दरवाज़े पर न्याय माँगे? खेती के संकट, क़र्ज़ और क़ानूनी उलझनों के बीच फँसे अन्नदाता की आवाज़।
मुख्य बिंदु
- खेती घाटे का सौदा क्यों बनती जा रही है
- ज़मीन और क़र्ज़ से जुड़े विवादों में किसान की बेबसी
- नीतियों और ज़मीनी हकीकत के बीच की दूरी
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