सोचिए • समझिए • सवाल कीजिए

Azaad Kalamसवाल • विचार • संवाद
कृषि एवं पर्यावरण

उजड़ती खेती, उजड़ते गाँव

Ujarti Kheti, Ujarte Gaon

घाटे का सौदा बनती भारतीय कृषि, पलायन का दंश झेलते गाँव और किसान की बेबसी के पीछे छिपे नीतिगत कारणों की ज़मीनी पड़ताल।

1 पत्र प्राप्त हुए
पुस्तक विवरण
आवरण पर लेखकएन. सिंह (N. Singh)
श्रेणीकृषि संकट एवं ग्रामीण भारत
प्रारूपपेपरबैक

पुस्तक के बारे में

भारतीय खेती आज घाटे का सौदा क्यों बन गई है? गाँव ख़ाली क्यों हो रहे हैं? यह पुस्तक किसान की बेबसी के पीछे छिपे नीतिगत कारणों की ज़मीनी पड़ताल करती है।

प्रमुख विषय

  • लागत, मूल्य और किसान की आमदनी का गणित
  • गाँवों से पलायन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था
  • कृषि नीतियाँ: वादे बनाम ज़मीनी हकीकत

पत्र और आभार

‘उजड़ती खेती, उजड़ते गाँव’ के बारे में संस्थानों और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों से प्राप्त पत्र। लेखक के अनुरोध पर उनका निजी पता धुंधला कर दिया गया है।

  • प्रशंसा-पत्र

    भारतीय किसान यूनियन

    “आपका यह प्रयास किसानों में नयी ऊर्जा प्रदान करेगा।”

    — चौ. राकेश टिकैतराष्ट्रीय प्रवक्ता

    प्रशंसा-पत्र

    भारतीय किसान यूनियन

    पत्र की स्कैन प्रति — भारतीय किसान यूनियन, 2 मार्च 2022
    2 मार्च 2022

    मूल पत्र (हिंदी)

    मान्यवर,

    आपके द्वारा लिखित उजड़ती खेती उजड़ते गांव शीर्षक नामक पुस्तक का पार्सल प्राप्त हुआ है। जिसमें किसान का दर्द, आन्दोलन आदि पर प्रकाश डाला गया है और कृषि की चुनौतियों को भी सम्मिलित किया गया है।

    आपका यह प्रयास किसानों में नयी ऊर्जा प्रदान करेगा।

    आपके इस प्रयास के लिए आपको बधाई प्रेषित करता हूँ और उम्मीद करता हूँ कि भविष्य में भी आप किसानों के दर्द को लिपिबद्ध करते रहेंगे।

    भवदीय, चौ० राकेश टिकैत (राष्ट्रीय प्रवक्ता भाकियू)

    अंग्रेज़ी अनुवाद

    Respected Sir,

    I have received the parcel of your book titled ‘Ujarti Kheti, Ujarte Gaon’. It sheds light on the pain of farmers, their movements and more, and also covers the challenges facing agriculture.

    Your effort will give new energy to farmers.

    I congratulate you on this effort and hope that in future too you will keep putting the pain of farmers into words.

    Yours sincerely, Ch. Rakesh Tikait (National Spokesperson, Bharatiya Kisan Union)

इस विषय पर चिंतनशील आवाज़

किसान और गाँव

किसान न्याय मांग रहा है! आख़िर कब मिलेगी इंसाफ़ की आवाज़?