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Azaad Kalamसवाल • विचार • संवाद

आज़ाद कलम  •  चिंतनशील आवाज़

हर बात पर सहमत होना ज़रूरी नहीं,लेकिन हर बात को समझना ज़रूरी है।

आज़ाद कलम सामाजिक मुद्दों और उन सवालों पर बात करता है, जिन पर अक्सर खुलकर चर्चा नहीं होती।

यहाँ किसी विचारधारा या पक्ष का प्रचार नहीं, बल्कि सवाल, विचार और संवाद की जगह है।

क्योंकि सवाल करना विरोध नहीं, समझने की पहली सीढ़ी है।

एन. सिंह की कृतियाँ

पुस्तक संसार

समकालीन राजनीति, बुद्धकालीन इतिहास और ग्रामीण भारत—तीन धाराएँ, एक सवाल: हम अपने समाज को कितना समझते हैं?

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चिंतनशील आवाज़

ज़मीनी सवालों पर सीधा संवाद—किसान, लोकतंत्र, जनगणना और समाज।

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किसान और गाँव

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ज़मीन के काग़ज़ और अदालत के नोटिस हाथ में लिए किसान आख़िर किस दरवाज़े पर न्याय माँगे? खेती के संकट, क़र्ज़ और क़ानूनी उलझनों के बीच फँसे अन्नदाता की आवाज़।

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क्योंकि सवाल करना विरोध नहीं, समझने की पहली सीढ़ी है।

आज़ाद कलम

अधूरी जातिगत जनगणना आँकड़ा नहीं, भ्रम है।

‘गिनती से सत्ता तक’ — एन. सिंह

‘पवित्रता’ लोकतंत्र की आत्मा है और अनुशासन उसका शरीर।

‘अनोखा भारत’ — विमला सिंह एवं एन. सिंह

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—— लोग | विचार | एक बेहतर समाज की ओर

लेखक एन. सिंह (नथुनी सिंह)

लेखक परिचय

एन. सिंह (नथुनी सिंह)

एन. सिंह—जिन्हें नथुनी सिंह और नथुनी सिंह कोदन्ना के नाम से भी जाना जाता है—हिंदी के लेखक, सामाजिक इतिहासकार और समकालीन राजनीति के टिप्पणीकार हैं।

पूर्वांचल के शाक्य-मल्ल और सैंथवार समाज पर ऐतिहासिक शोध से शुरू हुई उनकी लेखनी आज लोकतंत्र, जनगणना, कृषि संकट और राष्ट्रवाद जैसे राष्ट्रीय प्रश्नों तक पहुँची है। आज़ाद कलम उनका मंच है और चिंतनशील आवाज़ उनका वीडियो संवाद।

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आज़ाद कलम

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एन. सिंह

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