1 मिनट पढ़ने का समय
अधूरी जातिगत जनगणना: आँकड़ा नहीं, भ्रम
यदि जनगणना में केवल यह गिन लिया जाए कि किस जाति की कितनी संख्या है, तो वह मात्र सांख्यिकीय जानकारी होगी, सामाजिक यथार्थ नहीं।
आज़ाद कलम
लेख, टिप्पणियाँ और पुस्तकों से उपजे विचार—26 लेख। पढ़िए, सोचिए, और सवाल कीजिए।
1 मिनट पढ़ने का समय
यदि जनगणना में केवल यह गिन लिया जाए कि किस जाति की कितनी संख्या है, तो वह मात्र सांख्यिकीय जानकारी होगी, सामाजिक यथार्थ नहीं।
1 मिनट पढ़ने का समय
आज़ाद कलम किसी विचारधारा या पक्ष का प्रचार नहीं, बल्कि सवाल, विचार और संवाद की जगह है।
5 मिनट पढ़ने का समय
अगर किसी बीमार आदमी का दिन-रात सिर्फ वजन और बुखार नापते रहें, पर उसे न खाना दें न दवा, तो क्या वह बलवान बनेगा? सिर्फ जातियों की गिनती से नहीं, समृद्धि की यह है असली राह।
5 मिनट पढ़ने का समय
आज हर पार्टी अपनी सुविधा से किसी एक महापुरुष का पोस्टर टांग लेती है। लेकिन क्या कभी हमने सोचा कि अम्बेडकर का बंधुत्व, भगत सिंह का समाजवाद और पटेल-सावरकर का राष्ट्र मॉडल क्या था?
5 मिनट पढ़ने का समय
अगर गाड़ी चलाते समय ड्राइवर लगातार पीछे का शीशा ही देखता रहे, तो एक्सीडेंट पक्का है! आज हमारे नेता आज के अस्पताल और रोज़गार पर बोलने के बजाय 400 साल पुराने मुगलों पर भाषण क्यों देते हैं?
5 मिनट पढ़ने का समय
1932 में यरवदा जेल में गांधी जी का आमरण अनशन और बाबासाहेब का भारी मन से किया गया समझौता—जानिए कैसे आज के आरक्षित सांसद अपने ही समाज के लिए गूंगे-बहरे बनकर रह गए हैं।
4 मिनट पढ़ने का समय
जिस गोली को बनाने में 2 रुपये की लागत आती है, उस पर 100 रुपये की एमआरपी क्यों छपती है? सरकारी अस्पतालों की बदहाली और प्राइवेट मेडिकल माफिया का वह गठजोड़ जिसने गरीब को कंगाल बना दिया।
5 मिनट पढ़ने का समय
माइनस 40 डिग्री पर सरहद की रक्षा 35 हजार रुपये पाने वाला गरीब किसान का बेटा करता है। और टैक्स चोरी करके 7-स्टार होटलों में पार्टियां करने वाले खुद को राष्ट्र का मालिक बताते हैं!
4 मिनट पढ़ने का समय
कार बनाने वाला कार की कीमत खुद तय करता है, लेकिन 140 करोड़ लोगों का पेट भरने वाला किसान अपनी फसल की कीमत खुद तय क्यों नहीं कर पाता? मंडी से लेकर संसद तक की कड़वी सच्चाई।
4 मिनट पढ़ने का समय
इतिहास में हम पढ़ते हैं कि मुगलों और अंग्रेजों ने भारत की 'सोने की चिड़िया' को लूटा। लेकिन आज़ादी के बाद जो लूट देशी उद्योगपतियों और नेताओं की मिलीभगत से हो रही है, उसका सच क्या है?
4 मिनट पढ़ने का समय
जो नेता संसद में बैठकर देश के भविष्य का फैसला करते हैं, क्या उन्होंने कभी सरहद पर गोली की आवाज़ सुनी है? जानिए एन. सिंह का वह प्रस्ताव जो राजनीति से दलाली खत्म कर सकता है।
5 मिनट पढ़ने का समय
धूप में पसीना बहाकर आप जिसे चुनते हैं, वह चुनाव के बाद 5-स्टार होटल में मौज उड़ाता और करोड़ों में बिकता दिखता है। क्या हमारा लोकतंत्र सेवा है या सबसे मुनाफेदार धंधा?
4 मिनट पढ़ने का समय
पहले गाँव में किसी एक के घर विपदा आती थी, तो पूरी बस्ती दौड़ पड़ती थी। आज प्रधानी के चुनाव ने एक ही कुएं और एक ही चौपाल पर बैठने वाले पड़ोसियों को कट्टर दुश्मन बना दिया है।
5 मिनट पढ़ने का समय
होटल में आप पैसे देकर रुकते हैं और मौज करते हैं, उसकी हिफ़ाज़त आपकी ज़िम्मेदारी नहीं होती। लेकिन अपने घर की रक्षा के लिए आप जान भी दे सकते हैं। क्या हम भारत को होटल समझ रहे हैं?
4 मिनट पढ़ने का समय
चाय कौन बनाएगा और बर्तन कौन धोएगा—इस पर बहस करके सोशल मीडिया पर तालियां बटोरना आसान है, लेकिन क्या घर और समाज में स्त्री को उसके आत्मसम्मान और योग्यता का असली हक मिल पा रहा है?
5 मिनट पढ़ने का समय
संसद में तालियों की गड़गड़ाहट के बीच महिला आरक्षण पास तो हो गया, लेकिन उसके साथ दो ऐसी शर्तें जोड़ दी गईं कि यह वादा सालों के लिए लटक गया। जानिए परिसीमन का पूरा खेल।
4 मिनट पढ़ने का समय
महिला आरक्षण के अंदर ओबीसी और दलित महिलाओं के लिए अलग कोटे की मांग उठ रही है। सुनने में यह न्याय लगता है, लेकिन ज़मीन पर क्या होगा? क्या नीचे वाली औरत का चूल्हा बदल जाएगा?
4 मिनट पढ़ने का समय
गाँव में जब महिला प्रधानी जीतती है, तो कुर्सी पर उसका पति बैठता है। अब जब संसद में 33% आरक्षण लागू होगा, तो क्या वहाँ 'सांसदपति' पैदा नहीं होंगे? आवाज किसी और की, दिमाग किसी और का!
4 मिनट पढ़ने का समय
गाँव में पक्के मकान और ज़मीन वाले लोग रिश्वत देकर सरकारी आवास ले लेते हैं, जबकि खुले आसमान के नीचे पॉलीथीन तानकर सोने वाले बेघर का नाम लिस्ट में कभी नहीं आता।
5 मिनट पढ़ने का समय
एक बच्चा बड़े एसी स्कूल में लाखों की फीस देकर पढ़ता है और दूसरा गाँव के टूटे सरकारी प्राइमरी स्कूल में बोरी पर बैठकर पढ़ता है। क्या सिर्फ जाति के नाम पर दोनों को एक तराजू में तौलना न्याय है?
5 मिनट पढ़ने का समय
दूध को गर्म करने पर ऊपर मलाई जम जाती है। अगर सारी मलाई एक ही बिल्ली चट कर जाए, तो बाकी भूखी बिल्लियों का क्या होगा? आरक्षित वर्गों में जो अमीर बन चुके हैं, वे उस मलाई की तरह हैं।
5 मिनट पढ़ने का समय
जब किसी को बुखार होता है, तो डॉक्टर दवा देता है ताकि मरीज़ अपने पैरों पर खड़ा हो सके। लेकिन अगर कोई ज़िंदगी भर दवा के सहारे ही लेटा रहे, तो क्या वह कभी सेहतमंद बन पाएगा?
5 मिनट पढ़ने का समय
नेताओं के लिए भाषण देना आसान है कि 'जातिगत गणना कराओ', लेकिन एक सरकारी कर्मचारी जब रजिस्टर लेकर घर पहुँचता है, तो उसके सामने ऐसी पहेलियां आती हैं जिनका कोई सीधा जवाब नहीं है।
4 मिनट पढ़ने का समय
‘85 बनाम 15’ का नारा चुनावी रैलियों में बहुत गूँजता है। लेकिन क्या कभी किसी ने सोचा कि इस 85% के भीतर का सबसे कमजोर इंसान आज भी वहीं खड़ा क्यों है जहाँ 50 साल पहले था?
4 मिनट पढ़ने का समय
हम कहते हैं कि भारत बदल रहा है और जाति खत्म हो रही है। लेकिन अगर जाति सचमुच खत्म हो गई, तो चुनाव में उसका गणित क्यों बैठता है और शादी में उसका नाम क्यों पूछा जाता है?
5 मिनट पढ़ने का समय
गिनती अपने आप में बुरी नहीं होती, लेकिन जब गिनती का मकसद सिर्फ यह देखना हो कि किस जाति को किसके खिलाफ भड़काया जाए, तो वह न्याय नहीं बल्कि समाज को तोड़ना है।